इमरान की रिहाई की मांग के बीच खैबर-पख्तूनख्वा में इमरजेंसी, पाकिस्तान में गहराया सियासी संग्राम
पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब एक बड़े सियासी और सैन्य संकट में तब्दील हो चुका है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के बढ़ते दबाव और व्यापक प्रदर्शनों के बीच संघीय सरकार ने खैबर-पख्तूनख्वा में आपातकालीन उपाय लागू करने का फैसला किया है, जिससे देश में राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है।
इमरान खान को जेल से बाहर निकालने के लिए पीटीआई कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने सड़कों पर जोरदार प्रदर्शन शुरू किया था। प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने सड़कों पर सेना तक तैनात कर दी। हालांकि, जब यह कदम भी आंदोलन को थामने में नाकाम रहा, तो पीटीआई के शासन वाले एकमात्र प्रांत खैबर-पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू करने की नई रणनीति अपनाई गई। इसके तहत सेना को व्यापक अधिकार सौंपकर इमरान खान के समर्थकों और पार्टी तंत्र पर नकेल कसने की कवायद शुरू कर दी गई है।
शहबाज शरीफ की संघीय सरकार का दावा है कि प्रांत में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और पीटीआई सरकार आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने में नाकाम रही है। केंद्र सरकार के मुताबिक, पिछले ढाई वर्षों में इस प्रांत में आतंकवाद और उग्रवाद की घटनाओं में करीब 196 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साथ ही आरोप लगाया गया है कि प्रांतीय प्रशासन आतंकवाद से निपटने में केंद्र के साथ आवश्यक सहयोग नहीं कर रहा था।
दूसरी तरफ, पीटीआई ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया है। पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार ने आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए प्रांत को जरूरी फंड और संसाधन उपलब्ध नहीं कराए। पीटीआई के अनुसार, यह आपातकाल केवल पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने तथा उन्हें दबाने का एक जरिया है, लेकिन उनका संघर्ष रुकेगा नहीं।
इमरजेंसी लागू होते ही प्रांतीय सरकार की शक्तियां छीन ली गई हैं और पूरा प्रशासनिक नियंत्रण गवर्नर के हाथों में सौंप दिया गया है। प्रांत में सेना की टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं और पूर्व नेताओं व कार्यकर्ताओं की धरपकड़ तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर को उनके घर में नजरबंद कर दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खैबर-पख्तूनख्वा की पीटीआई सरकार सेना प्रमुख के प्रभाव को सीधी चुनौती दे रही थी, जिसके चलते सैन्य नेतृत्व और प्रांतीय सरकार का यह टकराव अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है।


