समुद्री जहाजों और नाविकों पर बढ़ते हमलों पर भारत ने जताई गंभीर चिंता: डॉ. एस. जयशंकर ने की भारत-लाइबेरिया संयुक्त पहल की घोषणा

नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: खाड़ी क्षेत्र, लाल सागर और काला सागर में वाणिज्यिक पोतों और नाविकों पर हो रहे हमलों को लेकर भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर गहरी चिंता व्यक्त की है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान ‘जहाजों और नाविकों की सुरक्षा एवं संरक्षा पर मित्र समूह’ की पहली उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने पर बल दिया।

विदेश मंत्री के संबोधन, प्रमुख चिंताओं और नई पहलों से जुड़े मुख्य बिंदु:

  • अब अलग-थलग घटनाएं नहीं: विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि समुद्री मार्गों पर वाणिज्यिक जहाजों और चालक दल पर हो रहे हमले अब कोई इक्का-दुक्का या अलग-थलग घटनाएं नहीं रह गई हैं, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं।
  • भारत-लाइबेरिया संयुक्त पहल: समुद्री सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने और नाविकों के संरक्षण पर वैश्विक ध्यान केंद्रित करने के उद्देश्य से डॉ. जयशंकर ने भारत और प्रमुख ध्वज-राष्ट्र (flag state) लाइबेरिया की संयुक्त पहल की घोषणा की।
  • भारतीय नाविकों से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख: अपने संबोधन में उन्होंने ओमान की खाड़ी में बल्क कैरियर एमवी केप दाओ (MV Cape Dao) पर हुए हमले का हवाला दिया, जिसमें एक भारतीय नाविक की दुखद मौत हो गई थी। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकर एल गैया (El Gaia) पर हुए हमले का भी उल्लेख किया, जिसके बाद एक भारतीय चालक दल सदस्य लापता हो गया था।
  • नागरिकों की सुरक्षा और व्यापारिक मार्गों का संरक्षण: डॉ. जयशंकर ने दो-टूक कहा कि वैध समुद्री व्यापार में बाधा डालने और निर्दोष नागरिकों की जान जोखिम में डालने वाले किसी भी हमले को किसी भी सूरत में उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुट होकर ऐसे हमलों की रोकथाम और समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाने का आह्वान किया।

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