जमुई कांड पर सियासत तेज: नाबालिग की पहचान उजागर करने के आरोप में मीसा भारती ने सम्राट चौधरी के खिलाफ FIR की मांग की
पटना (बिहार): जमुई में नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में पीड़िता की पहचान उजागर होने के आरोप को लेकर बिहार का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। पाटलिपुत्र से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सांसद मीसा भारती ने पटना के सचिवालय थाने पहुंचकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की औपचारिक मांग की। सांसद का आरोप है कि मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से पीड़िता और उसके परिजनों की तस्वीर साझा करने से नाबालिग की पहचान सार्वजनिक हुई है।
विवाद, कानूनी आपत्तियों और राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़े मुख्य बिंदु:
- POCSO और JJ एक्ट के उल्लंघन का आरोप: सांसद मीसा भारती ने सचिवालय थाने में दिए लिखित आवेदन में आरोप लगाया कि नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करना यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम और किशोर न्याय (JJ) अधिनियम का प्रत्यक्ष उल्लंघन है। उन्होंने इन प्रावधानों के तहत मुख्यमंत्री के खिलाफ तुरंत मामला दर्ज करने की मांग की।
- सचिवालय थाने में प्रदर्शन: मीसा भारती करीब डेढ़ घंटे तक सचिवालय थाने में मौजूद रहीं और उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक कानून सम्मत कार्रवाई नहीं होती, तब तक वह अपनी मांग पर अडिग रहेंगी। उन्होंने कहा कि कानून के समक्ष पद या राजनीतिक ओहदे के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।
- मुलाकात और सोशल मीडिया पोस्ट से उठा विवाद: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जमुई पहुंचकर पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात की थी। इसके बाद उनके आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से परिजनों के साथ तस्वीर पोस्ट की गई, जिसे विवाद बढ़ने के बाद हटा (डिलीट) लिया गया था।
- सीएमओ कर्मी पर प्राथमिकी दर्ज: प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया पर तस्वीर पोस्ट किए जाने के संबंध में सचिवालय थाने में मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के कर्मचारी सागर प्रसाद के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
- विपक्षी दलों के तीखे तेवर: विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून के पालन और प्रशासनिक कार्रवाई में राजनीतिक पद व जातिगत आधार पर दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि दर्ज प्राथमिकी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी जांच जारी है।


