काशी के दशाश्वमेध घाट पर 10 हजार अजन्मी बेटियों का पिंडदान: कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ दिया गया सामाजिक संदेश
वाराणसी: धर्म नगरी काशी में पितृपक्ष की मातृ नवमी के पावन अवसर पर एक अत्यंत संवेदनशील और भावनात्मक अनुष्ठान संपन्न हुआ। वाराणसी के ऐतिहासिक दशाश्वमेध घाट पर ‘आगमन’ सामाजिक संस्था के तत्वावधान में डॉ. संतोष ओझा के नेतृत्व में लगभग 10 हजार अजन्मी बेटियों (गर्भ में मारी गईं कन्याओं) की आत्मा की शांति के लिए विधिवत पिंडदान और तर्पण किया गया।
इस विशेष धार्मिक एवं सामाजिक अनुष्ठान को पांच वैदिक आचार्यों के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूर्ण किया गया। इसके तहत पिंडदान, तर्पण, पंचबलि और ब्राह्मण भोज कराया गया। संस्था के समर्पित कार्यकर्ताओं ने सुबह सात बजे से ही जौ के आटे, तिल, शहद, घी और पवित्र गंगाजल के मिश्रण से पारंपरिक रूप से पिंड तैयार किए थे।
संस्था के प्रमुख डॉ. संतोष ओझा ने इस अवसर पर कहा कि यह अनुष्ठान केवल एक धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में कन्या भ्रूण हत्या जैसी गंभीर और अमानवीय कुरीति के खिलाफ एक मुखर जनजागरण अभियान है। उन्होंने पूरे समाज से बेटियों के संरक्षण, उनके अधिकारों की रक्षा और उनके सम्मान को सुनिश्चित करने का पुरजोर आह्वान किया।
संस्था के प्रतिनिधियों के अनुसार, पिछले वर्षों में आयोजित किए गए ऐसे ही अनुष्ठानों को मिलाकर अब तक कुल 1.60 लाख से अधिक अजन्मी बेटियों के लिए मोक्ष और शांति हेतु पिंडदान व तर्पण किया जा चुका है।


