आयुष सेवा क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी 43%: संगठित संस्थानों में 50% से अधिक हिस्सेदारी, 17.6 लाख आजीविकाओं को मिला सहारा
नई दिल्ली: आयुष सेवा क्षेत्र देश में महिला सशक्तिकरण, रोजगार और आर्थिक भागीदारी के एक बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है। आर.आई.एस. (RIS) द्वारा आयुर्वेद दिवस 2026 के अवसर पर जारी एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, आयुष सेवा क्षेत्र के कुल कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत तक पहुंच गई है। विशेष रूप से संगठित आयुष संस्थानों—जैसे अस्पतालों, डे-केयर केंद्रों, शैक्षणिक संस्थानों और वेलनेस प्रतिष्ठानों में महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत से भी अधिक दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, स्पा और वेलनेस रिसॉर्ट्स में महिलाओं की भागीदारी 60 प्रतिशत से अधिक, शैक्षणिक संस्थानों में 58 प्रतिशत, डे-केयर केंद्रों में 57 प्रतिशत तथा अस्पतालों में 53 प्रतिशत है। आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने कहा कि आयुष सेवा क्षेत्र का विस्तार स्वास्थ्य प्रणाली को सशक्त करने के साथ-साथ उद्यमिता, कौशल विकास और कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी के नए द्वार खोल रहा है।
तेजी से बढ़ता आयुष का आर्थिक दायरा: वर्ष 2024-25 में आयुष सेवा क्षेत्र का कुल अनुमानित आकार 36.92 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसने वर्ष 2022-23 से 16.91 प्रतिशत की वार्षिक औसत वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की है। यह क्षेत्र प्रत्यक्ष तौर पर लगभग 17.6 लाख आजीविकाओं को सहारा दे रहा है। इसमें स्वतंत्र और स्थानीय क्लीनिकों की हिस्सेदारी सबसे अधिक 43.9 प्रतिशत (लगभग 16.21 अरब डॉलर) है।
चिकित्सा प्रणालियों में आयुर्वेद सबसे बड़ा खंड है, जिससे कुल राजस्व का लगभग 48 प्रतिशत (17.73 अरब डॉलर) प्राप्त होता है। इसके अलावा, मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (MVT) से वर्ष 2024-25 में 1.77 अरब डॉलर का राजस्व मिला। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा के अनुसार, बेहतर मानकों और डिजिटल सुविधाओं के साथ यह क्षेत्र समावेशी आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभा रहा है। अनुमान है कि वर्ष 2047 तक यह क्षेत्र 216 से 318 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है, जो ‘विकसित भारत@2047’ के लक्ष्य को मजबूती देगा।


