उत्तराखंड: बागेश्वर के कपकोट में भूस्खलन से शंभू नदी पर बनी 800 मीटर लंबी कृत्रिम झील, विशेषज्ञों से जांच कराने की सिफारिश
देहरादून/बागेश्वर: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले की कपकोट तहसील अंतर्गत कुंवारी गांव में लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण शंभू नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया है। पहाड़ी दरकने से भारी मात्रा में मलबा, बोल्डर और पेड़ नदी में गिरने से लगभग 800 मीटर लंबी कृत्रिम झील बन गई है। सिंचाई विभाग की तकनीकी टीम ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति का स्थलीय निरीक्षण किया।
यद्यपि वर्तमान में झील से पानी की निकासी हो रही है, परंतु सक्रिय भूस्खलन क्षेत्र होने के कारण डाउनस्ट्रीम इलाकों के लिए खतरा निरंतर बना हुआ है।
घटनाक्रम, वर्तमान स्थिति और तकनीकी सुझावों से जुड़े मुख्य बिंदु:
- 800 मीटर लंबी झील और मलबे का जमाव: निरीक्षण के दौरान झील के मुहाने से डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में करीब 250 मीटर तक भारी मलबा जमा पाया गया है। लगातार मलबा गिरने पर झील का आकार और जलस्तर बढ़ने की आशंका है।
- जल निकासी की मौजूदा व्यवस्था: सिंचाई विभाग द्वारा पिछले वर्ष बनाए गए नाले के जरिए फिलहाल पानी की नियंत्रित निकासी की जा रही है। हालांकि, भूस्खलन जारी रहने की दशा में इस नाले के अवरुद्ध होने का खतरा बना हुआ है।
- त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता: निरीक्षण समिति ने नदी में जमे मलबे को तत्काल हटाने और जल निकासी को सुचारु बनाए रखने के लिए मानव श्रम के साथ अत्याधुनिक पोकलेन/जेसीबी मशीनों के इस्तेमाल का सुझाव दिया है।
- विशेषज्ञ एजेंसियों से जांच की सिफारिश: खतरे के स्थायी समाधान हेतु समिति ने ‘उत्तराखंड लैंडस्लाइड मिटिगेशन एंड मैनेजमेंट सेंटर’ (ULMMC), देहरादून अथवा टीएचडीसी (THDC) जैसी विशेषज्ञ संस्थाओं से विस्तृत भू-गर्भीय अन्वेषण कराने की अनुशंसा की है।
- निरीक्षण दल: निरीक्षण टीम में सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता जगत सिंह बिष्ट, तहसीलदार नितिशा आर्या, अवर अभियंता मुस्तकीन और भू-विज्ञानी सुनील दत्त शामिल थे।


