उत्तराखंड: मसूरी के खेतवाला गांव में भारी भूस्खलन, मलबे से मुख्य मार्ग बंद, ग्रामीणों ने खुद बनाया रास्ता
देहरादून, 12 जुलाई: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मानसून की दस्तक के साथ ही जनजीवन अस्त-व्यस्त होने लगा है। देहरादून जनपद के मसूरी स्थित खेतवाला गांव में लगातार हो रही मूसलाधार बरसात ने हालात गंभीर कर दिए हैं। यहां करीब एक करोड़ रुपये की लागत से बन रही नई संपर्क सड़क से निकला मलबा और भारी भूस्खलन (Landslide) पूरे गांव के लिए बड़ी आफत बन गया है।
खेतवाला गांव को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग कई स्थानों पर पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। सड़क पर बड़े-बड़े बोल्डर और मलबा जमा होने के कारण वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप है। सबसे बड़ा खतरा पहाड़ी पर अटके उन विशालकाय पत्थरों से है, जो कभी भी नीचे गिरकर किसी बड़े हादसे को अंजाम दे सकते हैं।
ग्रामीणों ने खुद काटा जंगल, गर्भवती महिलाओं और मरीजों की चिंता बढ़ी
प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस मदद न मिलने से परेशान होकर ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं ने हिम्मत दिखाई। उन्होंने खुद झाड़ियां और घास काटकर जंगल के बीच से एक संकरा पैदल रास्ता तैयार किया है, ताकि स्कूली बच्चे, मजदूर, बुजुर्ग और अन्य ग्रामीण किसी तरह आवाजाही कर सकें। स्थानीय निवासियों विपिन रावत और सुनील खैरवाण ने बताया कि यदि गांव में किसी गर्भवती महिला या गंभीर मरीज को अचानक अस्पताल ले जाना पड़े, तो स्थिति बेहद चिंताजनक और जानलेवा हो सकती है। बरसात के कारण क्षेत्र में सड़क संपर्क टूटने के साथ-साथ पेयजल (पीने के पानी) का संकट भी गहरा गया है।
घटिया निर्माण और लापरवाही के आरोप:
ग्रामीणों और स्थानीय निवासी विनोद रावत का सीधा आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान ठेकेदार और विभाग ने लापरवाही बरती। खुदाई से निकले मलबे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण नहीं किया गया, जिसके चलते पहली ही तेज बारिश में यह मलबा बहकर कंपनी गार्डन और आसपास के गांवों के मार्गों पर फैल गया। यह मलबा अब रिस्पना नदी तक पहुंच रहा है, जिससे पर्यावरण और वन संपदा को भारी नुकसान हो रहा है। इसके अलावा, भूस्खलन रोकने के लिए सड़क किनारे बनाई गई सुरक्षा दीवार (Retaining Wall) भी घटिया निर्माण के कारण कुछ ही महीनों में ढह गई।
कैबिनेट मंत्री के निर्देश भी बेअसर
जनता की शिकायतों के बाद विभाग ने मलबे को हटाने के लिए एक जेसीबी (JCB) मशीन तो मौके पर भेजी है, लेकिन राहत कार्य की गति बेहद धीमी है। ग्राम प्रधान विक्रम रावत ने बताया कि उन्होंने इस गंभीर समस्या को लेकर क्षेत्रीय विधायक और कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को ज्ञापन सौंपा था। मंत्री ने लोक निर्माण विभाग (PWD) को तुरंत और ठोस कार्रवाई करने के कड़े निर्देश दिए थे, लेकिन धरातल पर अभी तक कोई असरदार काम नहीं दिख रहा है और ग्रामीण अब भी मलबे के साए में जीने को मजबूर हैं।



