सेबी ने मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MII) के नियमों में बदलाव का पेश किया प्रस्ताव: बोर्ड में योग्य उम्मीदवारों का दायरा बढ़ाने पर जोर
नई दिल्ली: पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MII) के मौजूदा नियमों में संशोधन के लिए नए प्रस्ताव पेश किए हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्टॉक एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉरपोरेशन और डिपॉजिटरी जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों के गवर्निंग बोर्ड में योग्य उम्मीदवारों का दायरा विस्तृत करना तथा प्रमुख प्रबंधकीय पदों (KMP) के लिए योग्यता व अनुभव के मानदंडों को अधिक स्पष्ट और व्यावहारिक बनाना है।
नियामक का मानना है कि वर्तमान में लागू कड़े नियमों के चलते अनुभवी और योग्य पेशेवरों को बोर्ड में शामिल करने में आ रही कठिनाइयों को इन बदलावों के माध्यम से प्रभावी ढंग से दूर किया जा सकेगा।
प्रस्तावित सुधारों और प्रमुख शर्तों से जुड़े मुख्य बिंदु:
- बोर्ड में शामिल होने की पात्रता: नए प्रस्ताव के अंतर्गत व्यापक शेयरधारिता वाली कंपनियों (विस्तृत शेयरहोल्डिंग वाली संस्थाओं) के निदेशक भी निर्धारित शर्तों के साथ एमआईआई के बोर्ड में शामिल होने के पात्र बन सकेंगे।
- समूह कंपनियों के लिए छूट: यदि उस समूह की कोई अन्य कंपनी स्टॉक ब्रोकर या क्लियरिंग मेंबर के रूप में कार्यरत है, तब भी कुछ विशेष शर्तों के अधीन ऐसे निदेशकों को बोर्ड में स्थान मिल सकेगा।
- शेयरधारिता की सीमा: सेबी ने ऐसी कंपनियों को परिभाषित करते हुए प्रस्ताव रखा है कि उनमें किसी भी निजी शेयरधारक की व्यक्तिगत हिस्सेदारी 10% से अधिक नहीं होनी चाहिए। हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र के शेयरधारकों को इस 10 प्रतिशत की सीमा से छूट प्रदान की जाएगी।
- प्रबंधन पदों के लिए स्पष्टता: प्रमुख प्रबंधन पदों के लिए आवश्यक अनुभव, कार्यक्षेत्र और योग्यता के मानदंडों को अधिक स्पष्ट किया जा रहा है ताकि संस्थानों का प्रशासनिक ढांचा मजबूत हो सके।
- अनुभवी पेशेवरों की उपलब्धता: इन संशोधनों से बाजार के बुनियादी ढांचे को संचालित करने वाले प्रमुख संस्थानों को कॉर्पोरेट जगत के उच्च अनुभवी और विशेषज्ञ पेशेवरों की सेवाएं प्राप्त करने में सुगमता होगी।



