12 साल बाद मलाणा रवाना हुए देव राजा घेपन: देव जमलू से होगा ऐतिहासिक देव मिलन, 136 किमी की पैदल यात्रा शुरू
शिमला / लाहौल-स्पीति: हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति में शनिवार को अगाध आस्था और समृद्ध देव परंपरा का भव्य संगम देखने को मिला। लाहौल घाटी के अधिष्ठाता देव राजा घेपन लगभग 12 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अपने बड़े भाई देव जमलू से ऐतिहासिक मिलन के लिए मलाणा (कुल्लू) के लिए रवाना हो गए हैं। इस पवित्र यात्रा में उनके साथ देवी हिडिम्बा और अठारह नाग देवता भी शामिल हैं।
रणसिंघों और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच शाशेन गांव से शुरू हुई इस यात्रा में सैकड़ों देवलु और श्रद्धालु शामिल हुए। पारंपरिक पोशाक में सजे-धजे श्रद्धालुओं ने क्षेत्र में शांति, सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना करते हुए देवताओं से आशीर्वाद प्राप्त किया।
7 दिनों में पूरी होगी 136 किलोमीटर की पैदल यात्रा
यह धार्मिक आयोजन पूरी तरह पैदल संपन्न होगा। 136 किलोमीटर लंबी यह यात्रा सात दिनों की अवधि में पूरी होगी।
- पहले दिन यह जत्था शाशेन से चलकर कोकसर पहुंचेगा।
- इसके बाद यात्रा ग्राम्फू, कुलंग, ढूंगरी, खगनाल, सॉयल, हरिपुर, छक्की, रुमसू और पुलग जैसे पारंपरिक पड़ावों से होते हुए आगे बढ़ेगी।
- यात्रा के अंतिम और सातवें दिन श्रद्धालु दुर्गम चंद्रखणी दर्रे को पार कर मलाणा गांव पहुंचेंगे, जहां दोनों भाइयों (देव राजा घेपन और देव जमलू) का ऐतिहासिक एवं पारंपरिक देव मिलन संपन्न होगा।
यह देव यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन न होकर लाहौल और कुल्लू घाटी की सदियों पुरानी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की जीवंत मिसाल है। 12 साल बाद आयोजित हो रही इस यात्रा में सभी प्राचीन रीति-रिवाजों और कड़े अनुशासन का पालन किया जा रहा है। मलाणा में आयोजित होने वाले इस अलौकिक मिलन के साक्षी बनने के लिए दोनों घाटियों से हज़ारों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है।



