बेटियों के लिए नया मंच: उत्तराखंड के पहले महिला स्पोर्ट्स कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया शुरू, आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा संस्थान

देहरादून, 19 जुलाई: उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण और खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की दिशा में आज एक ऐतिहासिक और नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री के प्राथमिकताओं वाले सीमांत जिले चम्पावत के लोहाघाट में स्थापित प्रदेश के पहले समर्पित महिला स्पोर्ट्स कॉलेज में नए सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया का औपचारिक शुभारंभ हो गया है। इस अनूठे संस्थान में दाखिला लेने और खेल के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से भारी संख्या में छात्राएं लोहाघाट पहुंच रही हैं।

प्रवेश को लेकर छात्राओं और उनके अभिभावकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। कॉलेज परिसर में खेल और शिक्षा के बेहतर अवसरों की नई उम्मीद के साथ छात्राएं ट्रायल और प्रवेश प्रक्रिया में हिस्सा ले रही हैं

कड़ी सुरक्षा और व्यवस्थित ढंग से चल रही है चयन प्रक्रिया

महिला स्पोर्ट्स कॉलेज लोहाघाट के प्रधानाचार्य मनोज शर्मा के अनुसार, कॉलेज परिसर में छात्राओं के दस्तावेज सत्यापन (डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन) और खेल कौशल की चयन प्रक्रिया को बेहद व्यवस्थित एवं पारदर्शी ढंग से संचालित किया जा रहा है। महिला खिलाड़ियों के विकास के लिए विशेष रूप से स्थापित किए गए इस संस्थान को अंतरराष्ट्रीय और आधुनिक खेल सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है

इस संस्थान में प्रवेश पाने वाली होनहार छात्राओं को निम्नलिखित उच्च स्तरीय सुविधाएं दी जाएंगी:

  • आधुनिक खेल प्रशिक्षण: विभिन्न खेलों के लिए कुशल और विशेषज्ञ कोचों द्वारा अत्याधुनिक ट्रेनिंग दी जाएगी।
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: खेल कौशल को निखारने के साथ-साथ छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए स्तरीय स्कूली शिक्षा का पूरा प्रबंध होगा।
  • आवासीय सुविधाएं: छात्राओं के सुरक्षित और आरामदायक ठहराव के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त छात्रावास (हॉस्टल) और पोषाहार उपलब्ध कराया जाएगा।

अभिभावकों और छात्राओं ने जताई खुशी

लोहाघाट पहुंचे अभिभावक कमल बुधानी और चयन प्रक्रिया में भाग लेने आई छात्राओं ने सरकार की इस अनूठी पहल पर अपनी गहरी प्रसन्नता व्यक्त की है। अभिभावकों का कहना है कि उत्तराखंड में पहली बार विशेष रूप से बेटियों के लिए इस तरह का अलग स्पोर्ट्स कॉलेज शुरू होने से उन्हें अब अपने घर के नजदीक ही खेल और शिक्षा के बेहतरीन राष्ट्रीय स्तर के अवसर मिल सकेंगे। इससे पहाड़ों की उन तमाम प्रतिभावान छात्राओं को आगे बढ़ने और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फलक पर राज्य का नाम रोशन करने के लिए एक मजबूत और नया मंच मिलेगा, जो संसाधनों के अभाव में पीछे छूट जाती थीं

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