पर्यावरण संरक्षण में बरेली छावनी ने रचा नया इतिहास, देश की पहली कार्बन ऋणात्मक छावनी बनी
लखनऊ, 27 जून : बरेली छावनी परिषद ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए देश की पहली कार्बन ऋणात्मक छावनी बनने का गौरव प्राप्त किया है। वर्षों पुराने वृक्षों के संरक्षण, हरित क्षेत्र के निरंतर विस्तार और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन के प्रभावी प्रयासों ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई है।
द एनर्जी एंड रिसोर्सेस इंस्टीट्यूट (टेरी) के वैज्ञानिकों के अनुसार, बरेली छावनी क्षेत्र प्रतिवर्ष लगभग 60 हजार टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर कार्बन का अवशोषण करने की क्षमता रखता है। छावनी में मौजूद घने वन क्षेत्र, विस्तृत हरित पट्टी और आधुनिक अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन संयंत्र ने इसे पर्यावरण संरक्षण का एक आदर्श मॉडल बना दिया है।
छावनी क्षेत्र में संचालित आधुनिक अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन संयंत्र में प्रतिदिन 35 से 40 टन ठोस कचरे का प्रसंस्करण कर विद्युत और जैव-संपीड़ित प्राकृतिक गैस का उत्पादन किया जाता है। इससे एक ओर प्रदूषण में कमी आई है, वहीं दूसरी ओर स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन को भी बढ़ावा मिला है।
छावनी परिषद की मुख्य अधिशासी अधिकारी तनु जैन ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए लगातार पौधरोपण, पुराने वृक्षों का संरक्षण, कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और हरित विकास की योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। इन सतत प्रयासों का ही परिणाम है कि बरेली छावनी आज पूरे देश के लिए पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में भी हरित विकास, स्वच्छ ऊर्जा और सतत पर्यावरणीय प्रबंधन की दिशा में इसी प्रकार कार्य जारी रहेगा, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण उपलब्ध कराया जा सके।



