पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन, लोककला जगत ने खोया अमूल्य रत्न

छत्तीसगढ़ की महान पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई का निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय लोककला और संस्कृति जगत को अपूरणीय क्षति पहुंची है। देश के सर्वोच्च नेतृत्व ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर बताया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया पर शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली व्यक्तित्व और अद्भुत प्रस्तुति शैली से महाभारत की कथाओं को जीवंत कर दिया। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने अपनी असाधारण प्रतिभा, समर्पण और वर्षों की कठिन साधना के बल पर छत्तीसगढ़ की पंडवानी परंपरा को देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में नई पहचान दिलाई। राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रसार में उनका योगदान सदैव याद रखा जाएगा।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपनी विलक्षण कला, दमदार गायन और प्रभावशाली मंच प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय लोक संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि उनका निधन कला और संस्कृति जगत के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी डॉ. तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के माध्यम से पंडवानी जैसी लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका जाना भारतीय कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।

डॉ. तीजन बाई ने अपने जीवन को लोककला के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित किया। उनकी अनूठी प्रस्तुति शैली और कला साधना आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

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