ग्वालियर में एनआरसी और आंगनवाड़ी के संयुक्त प्रयासों से कुपोषण पर मिली विजय: नन्हे निशांत के चेहरे पर लौटी मुस्कान
ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का जमीनी समर्पण कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में वरदान साबित हो रहा है। विकासखंड मुरार के ग्राम बिल्हेटी निवासी धर्मेंद्र और निशा के नन्हे पुत्र निशांत की जिंदगी में आया सकारात्मक बदलाव इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। जन्म के समय अत्यंत नाजुक स्वास्थ्य, मात्र 6.600 किलोग्राम वजन और 65 सेंटीमीटर लंबाई के चलते निशांत गंभीर कुपोषण की स्थिति से जूझ रहा था, जिससे परिजन अत्यंत चिंतित थे।
इस संकटपूर्ण स्थिति में स्थानीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उषा राणा ने निशांत के लक्षणों को समय रहते पहचाना और परिजनों को तत्काल पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने की सलाह दी। परिजनों के मन में शुरुआत में हिचकिचाहट और आशंकाएं थीं, किंतु आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने निरंतर परामर्श और धैर्यपूर्वक समझाइश देकर परिवार को एनआरसी में भर्ती कराने के लिए सहमत किया।
पुनर्वास प्रक्रिया और स्वास्थ्य सुधार के मुख्य चरण:
- एनआरसी में 14 दिवसीय उपचार: पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती के दौरान निशांत को 14 दिनों तक बाल रोग विशेषज्ञों की निगरानी, संतुलित आहार, चिकित्सीय परामर्श और विशेष देखभाल प्रदान की गई।
- स्वास्थ्य में निरंतर सुधार: नियमित पोषण और चिकित्सा के प्रभाव से निशांत के वजन और लंबाई में सामान्य व स्वस्थ वृद्धि दर्ज की गई तथा उसकी शारीरिक स्थिति सुदृढ़ हुई।
- सतत फॉलोअप निगरानी: अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उषा राणा ने तीन बार घर जाकर फॉलोअप विजिट की और माता-पिता को शिशु के उचित पोषण व देखभाल की बारीकियां समझाईं।
- परिवार का आभार: बच्चे के पूर्ण स्वस्थ होने पर माता-पिता ने राज्य सरकार की एनआरसी व्यवस्था और आंगनवाड़ी व्यवस्था के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए जीवनदायिनी पहल बताया।
यह सफलता दर्शाती है कि समय पर पहचान, सही पोषण प्रबंधन और सतत निगरानी के जरिए गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को भी नया और स्वस्थ जीवन दिया जा सकता है।



