‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’: लखनऊ में संयुक्त संसदीय समिति की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक संपन्न, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
लखनऊ, 15 जुलाई: देश में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ (One Nation One Election) की अवधारणा को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की तीन दिवसीय विचार-विमर्श बैठक बुधवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में संपन्न हो गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में समिति ने प्रस्तावित संविधान (संशोधन) विधेयकों के विभिन्न पहलुओं पर गहन मंथन किया। बैठक के अंतिम दिन समिति ने प्रदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षण संस्थानों के कुलपतियों, निदेशकों, कानूनी विशेषज्ञों और राजनीति विज्ञान के विद्वानों के साथ विस्तृत संवाद स्थापित कर उनके बहुमूल्य सुझाव आमंत्रित किए।
शीर्ष संस्थानों के प्रतिनिधियों ने रखा अपना पक्ष
इस परामर्श प्रक्रिया में देश और प्रदेश के कई अग्रणी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें मुख्य रूप से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) लखनऊ, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) कानपुर, डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ शामिल थे। इसके अतिरिक्त, रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय तथा बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने भी समिति के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत किए।
संवैधानिक और प्रशासनिक पहलुओं पर गहन विमर्श
बैठक के दौरान शिक्षाविदों और नीति विशेषज्ञों ने प्रस्तावित विधेयकों के प्रमुख प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया:
- केंद्र-राज्य संबंधों पर पड़ने वाला प्रभाव और मध्यावधि चुनावों की स्थिति।
- किसी विधानसभा या लोकसभा के शेष कार्यकाल (Unexpired Term) की व्यवस्था।
- एक साथ चुनाव प्रणाली की स्थिरता, दीर्घकालिक व्यवहार्यता और निर्वाचन आयोग को प्रस्तावित शक्तियां।
विद्वानों द्वारा उठाए गए कई जटिल प्रश्नों पर समिति के सदस्यों ने स्पष्टीकरण मांगे, जिसके बाद कुछ विषयों पर विशेषज्ञों को लिखित रूप में विस्तृत उत्तर प्रस्तुत करने की अनुमति भी प्रदान की गई।
जनभागीदारी पर विशेष बल
संस्थानों के प्रतिनिधियों से संवाद के उपरांत, जेपीसी ने उत्तर प्रदेश के पद्म पुरस्कार विजेताओं, नागरिक समाज (सिविल सोसाइटी) के प्रतिनिधियों और मीडिया जगत की प्रमुख हस्तियों के साथ भी विचार-विमर्श किया। समिति ने इस पूरी प्रक्रिया में जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित किया और उपस्थित गणमान्य नागरिकों को प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों के विभिन्न आयामों से अवगत कराया।



