‘एक देश, एक चुनाव’ पर जेपीसी बैठक में टकराव: पी. चिदंबरम ने बताया संघीय ढांचे के खिलाफ, शिवराज सिंह चौहान का पलटवार
नई दिल्ली: ‘एक देश, एक चुनाव’ (One Nation, One Election) को लेकर गठित संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बैठक में पूर्व केंद्रीय वित्त एवं गृह मंत्री पी. चिदंबरम शामिल हुए। समिति के समक्ष अपना पक्ष रखने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने प्रस्तावित विधेयक को देश के संघीय ढांचे और संसदीय लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ करार दिया। उन्होंने दावा किया कि यदि यह विधेयक संसद से पारित भी हो जाता है, तब भी वर्ष 2029 में लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ संपन्न कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसके विरोध में देशभर में व्यापक अभियान चलाएंगे।
पी. चिदंबरम के इस रुख पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश में 1951-52 से लेकर 1967 तक कांग्रेस के ही शासनकाल में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ आयोजित होते रहे हैं।
जेपीसी बैठक और दोनों पक्षों के प्रमुख तर्क:
- विपक्ष का विरोध: पी. चिदंबरम ने कानून को लोकतांत्रिक व संघीय सिद्धांतों के प्रतिकूल बताते हुए 2029 में इसके क्रियान्वयन को अव्यावहारिक बताया।
- ऐतिहासिक व्यवस्था का हवाला: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सवाल उठाया कि जब 1967 तक यह व्यवस्था लागू थी तब यह लोकतंत्र के अनुकूल थी, तो आज अचानक असंवैधानिक कैसे हो गई।
- वित्तीय बचत और राष्ट्रहित: सत्ता पक्ष का तर्क है कि एक साथ चुनाव कराने से देश के राजस्व और राजनीतिक दलों के भारी-भरकम चुनावी खर्चों में बड़ी बचत होगी।
- आगामी रणनीति: कांग्रेस व विपक्षी दलों ने इस नीति के विरुद्ध राष्ट्रव्यापी जन-अभियान चलाने की रूपरेखा तैयार की है।



