वीबी-जी-राम-जी योजना के लिए राज्यों को ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त जारी
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G-RAM-G]’ की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्यों को 25,863 करोड़ रुपये की पहली किस्त (मदर सैंक्शन) जारी की।
बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार ने एक जुलाई 2026 से पूरे देश में बिना किसी व्यवधान के इस योजना को लागू करने का संकल्प लिया था और यह सफलतापूर्वक पूरा हुआ है। उन्होंने बताया कि मनरेगा से वीबी-जी-रैम-जी में बदलाव पूरी तरह सुचारु रहा है तथा अब तक किसी तकनीकी या संचालन संबंधी समस्या की सूचना नहीं मिली है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण गरीबों को सम्मानजनक रोजगार, समय पर मजदूरी और टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि मनरेगा को पूरे देश में लागू होने में लगभग तीन वर्ष लगे थे, जबकि वीबी-जी-रैम-जी को एक ही दिन में देशभर में लागू किया गया, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व, राज्यों के सहयोग और प्रशासनिक क्षमता का प्रमाण है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि योजना के पहले सप्ताह में बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों में कार्य शुरू हो चुके हैं और लाखों ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मिला है। उन्होंने आंध्र प्रदेश, केरल और राजस्थान की सराहना करते हुए कहा कि इन राज्यों ने पहले ही दिन बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध कराया। साथ ही ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड सहित कुछ राज्यों से शेष औपचारिकताएं शीघ्र पूरी करने का आग्रह किया।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नई योजना के तहत मजदूरी दर में औसतन 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है और अब देश के किसी भी राज्य में दैनिक मजदूरी 300 रुपये से कम नहीं होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना के लिए धन की कोई कमी नहीं होगी तथा राज्यों से आग्रह किया कि वे अपनी हिस्सेदारी समय पर जारी करें, ताकि श्रमिकों को 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने योजना में फेस ऑथेंटिकेशन, जियो-टैगिंग और अन्य तकनीकी उपायों के माध्यम से पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया।



