नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही: मृतकों की संख्या बढ़कर 750 हुई, 2,500 लापता; भारत ने भेजी राहत सामग्री और विशेषज्ञ टीमें
काठमांडू/नई दिल्ली: नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन के कारण स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। इस प्रलयंकारी प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 750 तक पहुंच गई है, जबकि लगभग 2,500 लोग अब भी लापता हैं। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, प्रभावित सभी आठ जिलों में खोज, राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं और अब तक 8,186 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
नेपाल-तिब्बत सीमा के समीप ग्लेशियर टूटने के बाद पानी, कीचड़ और मलबे के भीषण बहाव ने मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों को जलमग्न कर भारी तबाही मचाई है, जिससे सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को व्यापक नुकसान पहुंचा है।
आपदा राहत और भारत द्वारा दी जा रही मानवीय सहायता के प्रमुख बिंदु:
- भारत से राहत सामग्री की आपूर्ति: संकट की इस घड़ी में भारत की ओर से अब तक कुल 68.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी जा चुकी है। रविवार को 11 टन राहत सामग्री लेकर चौथा भारतीय विमान नेपाल पहुंचा।
- विशेषज्ञ टीमों और उपकरणों की तैनाती: भारत ने बचाव कार्यों में तकनीकी सहयोग के लिए सुरंग विशेषज्ञों (Tunnel Experts), उन्नत खोज व बचाव उपकरणों और डीएनए विश्लेषण के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की विशेष टीमें भेजी हैं।
- जलविद्युत सुरंगों का निरीक्षण: भारतीय तकनीकी दल ने नुवाकोट के त्रिशूली क्षेत्र में स्थित जलविद्युत सुरंगों का तकनीकी मुआयना किया है।
- बेली ब्रिज से संपर्क बहाली: आवागमन और संपर्क व्यवस्था को शीघ्र बहाल करने के लिए 230 फुट लंबे बेली ब्रिज के निर्माण से जुड़े उपकरणों से लदे 16 ट्रक नेपाल पहुंच चुके हैं।



