आपदा प्रबंधन में जेंडर संवेदनशीलता की दिशा में मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक पहल, यूएन वूमेन के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर

भोपाल: आपदा प्रबंधन को अधिक समावेशी, संवेदनशील और प्रभावी बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश ने देश का पहला जेंडर रिस्पॉन्सिव आपदा प्रबंधन मॉडल विकसित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। इसी क्रम में होमगार्ड, नागरिक सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन विभाग तथा यूएन वूमेन के बीच ‘प्रवाह फेज-2’ कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए मंगलवार को भोपाल स्थित होमगार्ड मुख्यालय में सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह एमओयू होमगार्ड महानिदेशक प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव की उपस्थिति में संपन्न हुआ। यूएन वूमेन की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव शोको इशिकावा तथा होमगार्ड एवं राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (एसडीईआरएफ) की ओर से उप पुलिस महानिरीक्षक अमित सांघी ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।

‘प्रवाह फेज-2’ का उद्देश्य आपदा प्रबंधन व्यवस्था में महिलाओं, बालिकाओं और अन्य संवेदनशील वर्गों की आवश्यकताओं को केंद्र में रखते हुए जेंडर संवेदनशील दृष्टिकोण को संस्थागत स्वरूप देना है। इसके तहत पहले चरण में तैयार की गई जेंडर रिस्पॉन्सिव डिजास्टर रिस्क रिडक्शन स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। साथ ही मानसून और अन्य आपदाओं के दौरान इसके व्यावहारिक परिणामों का मूल्यांकन कर भविष्य की रणनीति तैयार की जाएगी।

महानिदेशक प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने आपदा प्रबंधन में महिलाओं की आवश्यकताओं और उनकी सहभागिता को ध्यान में रखते हुए विशेष एसओपी तैयार की है। इससे राहत, बचाव, पुनर्वास और विस्थापन के दौरान रेस्क्यू टीमों को अधिक संवेदनशील एवं प्रभावी ढंग से कार्य करने में सहायता मिलेगी।

‘प्रवाह फेज-2’ के माध्यम से राहत एवं बचाव कार्यों में महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा, सहभागिता और विशेष आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली अधिक नागरिक-केंद्रित, समावेशी और संवेदनशील बनेगी तथा मध्यप्रदेश जेंडर रिस्पॉन्सिव आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित होगा।

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