AISHE रिपोर्ट: भारत में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव, कुल नामांकन पहुंचा 4.50 करोड़ के पार

नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2022-23 और 2023-24 के लिए अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) की नवीनतम रिपोर्ट जारी कर दी है. इस व्यापक सर्वे के आंकड़े दर्शाते हैं कि पिछले एक दशक में देश की उच्च शिक्षा नीति और बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, देश के उच्च शिक्षण संस्थानों (HEIs) ने इस सर्वेक्षण में 90% से अधिक की अनुकरणीय भागीदारी दर्ज की है.

नामांकन और सकल नामांकन अनुपात (GER) में रिकॉर्ड वृद्धि

सर्वेक्षण के मुख्य आकर्षणों में छात्र नामांकन में हुई भारी वृद्धि शामिल है. देश में उच्च शिक्षा में कुल नामांकन वर्ष 2014-15 के 3.42 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2023-24 में 4.50 करोड़ तक पहुंच गया है, जो कि 31.5% की शानदार वृद्धि को दर्शाता है. इसी तरह, सकल नामांकन अनुपात (GER)—जो 18-23 वर्ष के आयु वर्ग में शिक्षा की पहुंच को मापता है—वर्ष 2014-15 के 23.7 से लगातार बढ़ते हुए वर्ष 2023-24 में 30.0 के स्तर पर आ गया है.

महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समावेश

इस रिपोर्ट का सबसे सकारात्मक पहलू महिलाओं और वंचित वर्गों की बढ़ती भागीदारी है:

  • जेंडर पैरिटी इंडेक्स (GPI): वर्ष 2023-24 के लिए जीपीआई 1.08 दर्ज किया गया है. यह लगातार सातवां वर्ष है जब जीपीआई 1.0 से ऊपर रहा है, जिसका सीधा मतलब है कि उच्च शिक्षा में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की भागीदारी अधिक है.
  • महिला नामांकन: बीते दशक में उच्च शिक्षा में महिला नामांकन 1.57 करोड़ से 42.2% बढ़कर 2.24 करोड़ हो गया है.
  • वंचित वर्गों का विकास: अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों का GER 18.9 से बढ़कर 27.8 और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों का GER 13.5 से बढ़कर 22.8 हो गया है.

STEM और शैक्षणिक संकाय में सुधार

विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र में भी देश ने लंबी छलांग लगाई है. STEM पाठ्यक्रमों में कुल नामांकन बढ़कर 1.02 करोड़ हो गया है, जिसमें महिला छात्रों की हिस्सेदारी बढ़कर 44% हो गई है. इसके अलावा, देश में कुल शिक्षकों की संख्या बढ़कर 17.32 लाख हो गई है, जिसमें महिला संकायों (शिक्षिकाओं) की संख्या अब 7.78 लाख तक पहुंच चुकी है.

यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत की उच्च शिक्षा न केवल अधिक सुलभ हो रही है, बल्कि लैंगिक और सामाजिक रूप से अधिक समावेशी भी बनती जा रही है.

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