भारत का मखाना सेक्टर वैश्विक मंच पर बना ब्रांड: वैश्विक आपूर्ति में बिहार की 80–85% हिस्सेदारी, निर्यात में तीन गुना से अधिक वृद्धि

नई दिल्ली: भारत का मखाना (फॉक्स नट) क्षेत्र वर्तमान में देश के सबसे तेजी से उभरते कृषि-खाद्य (एग्री-फूड) क्षेत्रों में से एक के रूप में पहचान बना रहा है। अपने उच्च पोषण मूल्य और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती वैश्विक जागरूकता के चलते मखाने की मांग देश-विदेश में तेजी से बढ़ रही है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा मखाना उत्पादक देश बना हुआ है। देश के कुल मखाना उत्पादन में अकेले बिहार राज्य का योगदान लगभग तीन-चौथाई (75%) है, जबकि वैश्विक मखाना आपूर्ति में बिहार की हिस्सेदारी 80 से 85 प्रतिशत के बीच है

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, भारतीय मखाने के निर्यात में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय उछाल आया है। वर्ष 2020 में जहां देश से मखाना निर्यात 7,260 मीट्रिक टन था, वहीं वर्ष 2024 में यह बढ़कर 25,130 मीट्रिक टन तक पहुंच गया। वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्यवर्धक और प्रीमियम स्नैक्स के रूप में बढ़ती मांग के कारण घरेलू बाजार में भी किसानों को इसकी अच्छी कीमतें मिल रही हैं

मखाना क्षेत्र को मजबूती देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम:

  • राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का गठन: मखाना उद्योग के समग्र विकास, अनुसंधान और विपणन को गति देने के लिए बोर्ड की स्थापना की गई है।
  • ₹476.03 करोड़ की केंद्रीय योजना: प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग), आधुनिक पैकेजिंग, ब्रांडिंग, निर्यात प्रोत्साहन और किसानों की क्षमता निर्माण के लिए ₹476.03 करोड़ की विशेष योजना संचालित की जा रही है।
  • ग्रामीण रोजगार व आय संवर्धन: बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग से मखाना उत्पादक किसानों की आय में वृद्धि हो रही है तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
  • कृषि निर्यात में मजबूती: मखाना क्षेत्र भारत की कृषि-खाद्य निर्यात क्षमता को वैश्विक पटल पर सुदृढ़ आधार प्रदान कर रहा है।

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