मध्य पूर्व में महायुद्ध की आहट: अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर किए भीषण हमले, युद्धविराम समझौता टूटा
नई दिल्ली, 19 जुलाई: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार को अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करते हुए बुनियादी ढांचे और महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर भीषण हमले किए। इस ताजा सैन्य टकराव के बाद दोनों देशों के बीच युद्ध की स्थिति और गंभीर हो गई है।
इस बड़े घटनाक्रम के बीच ईरान ने एक बड़ा कड़ा कदम उठाते हुए अमेरिका के साथ करीब एक महीने पहले हुए द्विपक्षीय समझौते से पूरी तरह पीछे हटने की आधिकारिक घोषणा कर दी है।
समझौते से पीछे हटा ईरान, अमेरिका पर लगाया आरोप
ईरानी मीडिया के हवाले से सामने आई खबरों के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारी काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर बातचीत जारी थी। लेकिन, अमेरिका ने खुद ही इस समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है, जिसके कारण अब तेहरान (ईरान) इस समझौते की किसी भी शर्त का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है।
इसी क्रम में ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने भी एक लिखित बयान जारी कर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस समझौता ज्ञापन को पूरी तरह से ‘बेकार’ और ‘व्यर्थ’ करार दिया है।
हफ्तों की शांति के बाद फिर भड़का तनाव
- सैन्य तनाव के बाद हुआ था समझौता: दोनों देशों के बीच यह समझौता कई सप्ताह तक चले भारी सैन्य तनाव और कूटनीतिक प्रयासों के बाद अस्तित्व में आया था, जिससे वैश्विक स्तर पर शांति और व्यापक वार्ता की उम्मीदें जगी थीं।
- अब समझौता हुआ निष्प्रभावी: हाल के दिनों में दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे पर फिर से किए गए हवाई व सैन्य हमलों और बढ़ते तनाव के कारण यह शांति समझौता अब लगभग पूरी तरह से निष्प्रभावी और खत्म हो चुका है।
- ट्रंप ने भी दिए थे संकेत: पिछले हफ्ते खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी एक बयान में कहा था कि उन्हें लगता है कि ईरान के साथ हुआ युद्धविराम (सीजफायर) अब आधिकारिक तौर पर समाप्त हो चुका है।
होर्मुज स्ट्रेट में दोनों शक्तिशाली देशों के बीच बढ़े इस सीधे सैन्य टकराव ने वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर दुनिया भर की चिंताओं को एक बार फिर से बढ़ा दिया है।
बदले की कार्रवाई: अमेरिका ने ईरान पर किए नए हवाई हमले, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के ठिकानों को बनाया निशाना
वॉशिंगटन (एआईआर), 19 जुलाई: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ एक बार फिर बड़े पैमाने पर नए हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी रक्षा मुख्यालय के अनुसार, यह दंडात्मक सैन्य कार्रवाई विशेष रूप से ईरान की ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ के ठिकानों को निशाना बनाकर की गई है।
अमेरिकी सेना का यह हमला जॉर्डन में हुए उस हालिया हमले का सीधा जवाब है, जिसमें दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी, एक सैनिक लापता है और चार अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी को तोड़ना मुख्य उद्देश्य
अमेरिकी सेंट्रल कमान (CENTCOM) ने इन हवाई हमलों की पुष्टि करते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया है। कमान के अनुसार, इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल टैंकरों के सुरक्षित आवागमन को रोकना या उसे प्रतिबंधित करने की ईरान की क्षमता को भारी नुकसान पहुंचाना है।
रणनीतिक रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है। उल्लेखनीय है कि:
- यह समुद्री मार्ग पूरी दुनिया की करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए एकमात्र अहम रास्ता है।
- अमेरिका का मानना है कि ईरान इस मार्ग पर अपना नियंत्रण बढ़ाकर वैश्विक तेल संकट पैदा करने की फिराक में है।
इस नए हवाई हमले के बाद मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में तनाव चरम पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने और युद्ध के और अधिक भड़कने की आशंका गहरा गई है।



