राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े मामले में उच्चतम न्यायालय ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्राप्त दान राशि में कथित वित्तीय अनियमितताओं और हेराफेरी के आरोपों से संबंधित याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। याचिका में आरोपों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से कराने तथा प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ के समक्ष हुई। याचिकाकर्ता ने अदालत से मामले की शीघ्र सुनवाई का अनुरोध करते हुए आशंका जताई कि यदि सुनवाई में विलंब हुआ तो इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है।
पीठ ने तत्काल सुनवाई का अनुरोध स्वीकार नहीं किया, लेकिन याचिकाकर्ता को शीघ्र सुनवाई के लिए न्यायालय की रजिस्ट्री में औपचारिक आवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि शीघ्र सुनवाई के अनुरोध पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।
याचिका में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्राप्त दान राशि के उपयोग में कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने और मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है।
उच्चतम न्यायालय के तत्काल सुनवाई से इनकार के बाद अब इस मामले की सुनवाई जुलाई में होने की संभावना जताई जा रही है। न्यायालय द्वारा शीघ्र सुनवाई संबंधी आवेदन पर निर्णय के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय होगी। फिलहाल न्यायालय ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है और केवल शीघ्र सुनवाई के अनुरोध पर प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया है।



