राजस्थान में पहली बार दुर्लभ श्वासनली पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा सफल, 29 वर्षीय युवती को मिला नया जीवन
जयपुर, 26 जून : जयपुर स्थित सवाई मानसिंह अस्पताल के चिकित्सकों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अत्यंत दुर्लभ और जटिल शल्य चिकित्सा सफलतापूर्वक संपन्न की है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने 29 वर्षीय युवती की गंभीर रूप से संकुचित मुख्य श्वासनली के प्रभावित हिस्से को हटाकर सात श्वासनली छल्लों को निकाला तथा श्वासनली का सफल पुनर्निर्माण कर उसे नया जीवन दिया।
मरीज सुप्यार देवी, अजमेर जिले के खाजपुरा गांव की निवासी हैं। जनवरी 2024 में सड़क दुर्घटना में उनके सिर में गंभीर चोट लगी थी। शल्य चिकित्सा के बाद वह लगभग एक महीने तक कोमा में रहीं। इस दौरान उन्हें सांस दिलाने के लिए गले में कृत्रिम श्वास नली लगानी पड़ी थी।
स्वास्थ्य में सुधार के बाद भी उन्हें लगातार सांस लेने में कठिनाई बनी रही। विभिन्न अस्पतालों में उपचार के बावजूद राहत नहीं मिलने पर मई 2026 में उन्हें सवाई मानसिंह अस्पताल लाया गया। विस्तृत जांच, संगणकीय चित्रण और आभासी श्वासनली परीक्षण से पता चला कि उनकी मुख्य श्वासनली में गंभीर संकुचन हो गया है, जिससे श्वास मार्ग अत्यंत संकरा हो चुका था।
चार जून 2026 को विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने उनका ऑपरेशन किया। श्वासनली के निचले हिस्से तक फैले संकुचन के कारण यह शल्य चिकित्सा अत्यंत जटिल थी। ऑपरेशन के दौरान शरीर में श्वास और रक्त संचार सामान्य बनाए रखने के लिए उन्हें हृदय-फेफड़ा सहायक यंत्र के सहारे रखा गया।
करीब साढ़े चार घंटे तक चली शल्य चिकित्सा में चिकित्सकों ने श्वासनली के गंभीर रूप से प्रभावित हिस्से को हटाया, जिसमें कुल सात श्वासनली छल्ले निकाले गए। इसके बाद श्वासनली के दोनों सिरों को सावधानीपूर्वक जोड़कर उसका पुनर्निर्माण किया गया। ऑपरेशन के दौरान मरीज को चार इकाई रक्त भी चढ़ाया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार सामान्यतः इस प्रकार की शल्य चिकित्सा में अधिकतम चार श्वासनली छल्ले ही हटाए जाते हैं। सात छल्लों को हटाकर सफल पुनर्निर्माण करना अत्यंत दुर्लभ उपलब्धि है और विश्व स्तर पर भी ऐसे मामले बहुत कम दर्ज हैं। राजस्थान में इस प्रकार की शल्य चिकित्सा पहली बार सफलतापूर्वक की गई है।
चिकित्सकों ने बताया कि श्वासनली के आसपास महत्वपूर्ण नसें और रक्त वाहिनियां होती हैं। शल्य चिकित्सा के दौरान इनमें क्षति होने पर मरीज को बोलने, निगलने और सांस लेने में स्थायी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसी कारण इसे अत्यधिक जोखिमपूर्ण और जटिल शल्य चिकित्सा माना जाता है।
सफल ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति लगातार बेहतर हो रही है और वह सामान्य जीवन की ओर लौट रही है। सवाई मानसिंह अस्पताल की इस उपलब्धि को राजस्थान के चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।



