मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जन्माष्टमी पर दिया लोकमंगल और राष्ट्रवाद का संदेश
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को मथुरा पहुँचे। उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर ठाकुर केशवदेव, माता योगमाया और श्रीकृष्ण चबूतरे की पूजा-अर्चना कर दर्शन किए। इसके बाद भागवत भवन के दर्शन करने के पश्चात् उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। जैसे ही मुख्यमंत्री ने “वृंदावन बिहारी लाल की जय” और “जय श्री राधे” के जयकारे लगाए, पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा।
मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीकृष्ण के 5252वें जन्मोत्सव की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ब्रजभूमि भगवान विष्णु के पूर्ण अवतार श्रीकृष्ण की लीलाओं से पावन हुई है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का यह सौभाग्य है कि भगवान के अनेक अवतारों ने इसकी भूमि को कृतार्थ किया है। अयोध्या से लेकर मथुरा तक यह क्षेत्र भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है।


डबल इंजन सरकार का विकास और विरासत का संरक्षण
अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बीते आठ-नौ वर्षों से उन्हें जन्माष्टमी और बरसाना के रंगोत्सव में सम्मिलित होने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने मथुरा, वृंदावन, बरसाना, गोकुल, बलदेव, गोवर्धन और राधाकुंड जैसे स्थलों को पुनः तीर्थ स्वरूप में स्थापित करने का संकल्प लिया है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में चल रही डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि प्रदेश आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आधुनिक विकास का कार्य कर रहा है। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या में निर्माणाधीन भव्य राम मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब एक नए प्रतिमान के साथ अपनी पहचान बना रहा है।
गौ संरक्षण और सामाजिक एकता पर बल
योगी आदित्यनाथ ने गौ संरक्षण को सनातन धर्म का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनकी सरकार इस दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए विशेष योजनाएँ लागू हैं और गौ पालन करने वाले किसानों को ₹1500 प्रति माह की सहायता दी जा रही है। वर्तमान में 16 लाख से अधिक गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने लोगों से जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर देश को कमजोर करने वाली प्रवृत्तियों से सावधान रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सैनिकों का सम्मान करना और सामाजिक एकता को मजबूत करना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सनातन धर्म का ध्वज दुनिया में मार्गदर्शन करता रहेगा, तब तक विश्व शांति, सौहार्द और भाईचारे का भाव बना रहेगा।
प्रधानमंत्री के पंच प्रण का उल्लेख
योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए ‘पंच प्रण’ को भी अपने संबोधन में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि गुलामी के चिन्हों को समाप्त करना, स्वदेशी को अपनाना, आध्यात्मिक विरासत का संरक्षण करना, जवानों का सम्मान करना और सामाजिक एकता को बढ़ावा देना हम सभी का संकल्प होना चाहिए। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या और विंध्यवासिनी धाम कॉरिडोर का उल्लेख करते हुए कहा कि ये परियोजनाएँ हमारी सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित कर रही हैं और श्रद्धालुओं के लिए नई सुविधाएँ उपलब्ध करा रही हैं।
ब्रज तीर्थ विकास परिषद की सराहना
मुख्यमंत्री ने ब्रज क्षेत्र के विकास में ब्रज तीर्थ विकास परिषद की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह परिषद क्षेत्र को आधुनिक विकास के साथ-साथ पौराणिक विरासत के अनुरूप नई पहचान दिला रही है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि पाँच हजार वर्षों से अधिक पुरानी इस धरोहर को सुरक्षित रखना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सबका कर्तव्य है।
सनातन धर्म के प्रतीकों का सम्मान
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंगा, यमुना, गौ माता, गायत्री और तीर्थस्थलों जैसे सनातन धर्म के प्रतीकों का सम्मान करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ये हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान के प्रतीक हैं और उनका संरक्षण करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने एक बार फिर सभी श्रद्धालुओं को जन्माष्टमी की शुभकामनाएँ दीं और उनके साथ “श्री केशव देव महाराज की जय”, “श्री कृष्ण कन्हैया की जय”, “श्री राधे रानी की जय”, “श्री यमुना मैया की जय” और “भारत माता की जय” के नारे लगाए।
उनका यह संबोधन न केवल धार्मिक आस्था का उत्सव था, बल्कि लोकमंगल और राष्ट्र मंगल का संदेश भी, जिसने मथुरा की पावन भूमि से पूरे देश में एकता, श्रद्धा और विकास का आह्वान किया।


