बिहार में ग्रीनफील्ड टाउनशिप योजना, किसानों को मिलेगा लाभ
नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के विकास तथा अधिसूचित विशेष क्षेत्रों में भूमि की खरीद-बिक्री पर अस्थायी रोक के संबंध में एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई। सूचना भवन के संवाद कक्ष में आयोजित इस वार्ता को संबोधित करते हुए विभाग के प्रधान सचिव श्री विनय कुमार ने विस्तृत जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि बिहार सरकार ने सुनियोजित शहरीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बिहार टाउन प्लानिंग स्कीम नियमावली, 2025 के अंतर्गत 11 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने का निर्णय लिया है। यह योजना केवल आधारभूत संरचना के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि भू-मालिकों को सशक्त बनाते हुए उन्हें टाउनशिप विकास में भागीदार बनाने की पहल है।
योजना के अंतर्गत समस्त भूमि को चौड़ी सड़कों, बिजली, जल निकासी एवं सीवर जैसी आधुनिक सुविधाओं से युक्त किया जाएगा। बिखरे हुए भू-खंडों का समेकन कर उन्हें नियमित आकार में व्यवस्थित किया जाएगा, जिससे उनकी उपयोगिता एवं बाजार मूल्य में वृद्धि होगी।
राज्य सरकार का लक्ष्य भू-मालिकों को विकसित भूमि का अधिकतम हिस्सा वापस करना है। इसके तहत 55 प्रतिशत विकसित भूमि भू-मालिकों को लौटाई जाएगी, जबकि 22 प्रतिशत भूमि आधारभूत संरचना के विकास हेतु, 5 प्रतिशत भूमि हरित क्षेत्र एवं सार्वजनिक सुविधाओं के लिए तथा 3 प्रतिशत भूमि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आवास के लिए निर्धारित की जाएगी। शेष 15 प्रतिशत भूमि विकास लागत की वसूली के लिए प्राधिकार के पास रहेगी।
प्रधान सचिव ने बताया कि विकास के पश्चात भूमि के बाजार मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, जो सामान्यतः वर्तमान मूल्य की तुलना में कई गुना अधिक होती है। जो भू-स्वामी योजना में सम्मिलित नहीं होना चाहते, उन्हें आपसी सहमति के आधार पर मुआवजा, टीडीआर (ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स) अथवा विकसित संपत्ति में हिस्सेदारी के विकल्प प्रदान किए जाएंगे। कुल मिलाकर, उन्हें उनकी मूल भूमि के मूल्य के लगभग चार गुना तक लाभ सुनिश्चित किया जाएगा।
प्रस्तावित टाउनशिप क्षेत्रों में भूमि के लेनदेन पर लगाया गया अस्थायी प्रतिबंध भू-मालिकों के हितों की रक्षा के लिए है, ताकि बिचौलियों द्वारा कम कीमत पर जमीन की खरीद को रोका जा सके। योजना पूर्ण होने के बाद भू-मालिक अपनी संपत्ति का उचित मूल्य प्राप्त कर सकेंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और प्रत्येक चरण में भू-मालिकों एवं आम जनता से परामर्श लिया जाएगा, ताकि विकास का वास्तविक लाभ सीधे जमीन मालिकों तक पहुंचे।
इस अवसर पर विभाग के विशेष सचिव श्री राजीव कुमार श्रीवास्तव तथा अपर सचिव श्री मनोज कुमार भी उपस्थित रहे।


