UPI यूजर्स पर नहीं लगेगा कोई चार्ज, सरकार ने किया साफ: P2P लेनदेन रहेंगे पूरी तरह मुफ्त
नई दिल्ली: डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और नागरिकों को राहत देने के उद्देश्य से भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि UPI से भुगतान करने वाले आम यूजर्स पर कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लगेगा। सरकार ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि सभी Person-to-Person (P2P) लेनदेन पहले की तरह मुफ्त रहेंगे और रोजमर्रा के भुगतानों पर नागरिकों को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।
संसद द्वारा Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 पारित होने के बाद मीडिया में चल रही विभिन्न अटकलों पर सरकार ने रुख स्पष्ट करते हुए निम्नलिखित प्रमुख बिंदु रखे हैं:
- व्यापारियों पर नाममात्र MDR: भविष्य में यदि MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लागू होता है, तो यह केवल एक निश्चित सीमा से ऊपर के सीमित मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर ही नाममात्र दर से लगेगा। यह दर क्रेडिट या डेबिट कार्ड के MDR से काफी कम होगी, और अधिकांश लेनदेन व्यापारियों के लिए भी मुफ्त रहेंगे।
- निर्णायक संस्था: MDR तय करने का अधिकार NPCI की अध्यक्षता वाली ‘UPI and Services Steering Committee’ के पास होगा।
- कानूनी संशोधन का उद्देश्य: Payment and Settlement Systems Act, 2007 में संशोधन का मकसद आम जनता पर शुल्क लगाना नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम और इंफ्रास्ट्रक्चर के निरंतर विकास के लिए यूपीआई को आत्मनिर्भर बनाना है।
सरकार ने उन मीडिया रिपोर्टों को भी भ्रामक और गलत बताया, जिनमें नीतिगत बदलावों के पीछे किसी बाहरी प्रभाव की बात कही जा रही थी।
UPI का बढ़ता वैश्विक दायरा: सरकार के अनुसार, 2016-17 में लॉन्च होने के बाद से UPI ने देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। जुलाई 2026 में UPI ने ₹29.9 लाख करोड़ के 2,366 करोड़ लेनदेन का रिकॉर्ड दर्ज किया है। वर्तमान में UPI सेवा 11 विदेशी देशों में लाइव है और कई अन्य देश भी इसे अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और NPCI ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से मिलने वाली जानकारी पर ही भरोसा करें और सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट संदेशों से बचें।



