आयुर्वेद महाविद्यालय में 418 बच्चों का हुआ स्वर्ण प्राशन संस्कार, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की पहल
जबलपुर के गौरीघाट स्थित शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय में शुक्रवार को 418 बच्चों का स्वर्ण प्राशन संस्कार किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाना और उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में शिशु अवस्था से लेकर 16 वर्ष तक के बच्चों ने भाग लिया।
महाविद्यालय के शिशु एवं बाल रोग विभाग की डॉ. गीता पांडे ने सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। परीक्षण के बाद बच्चों को उनकी आयु के अनुसार स्वर्ण भस्म, गौ घृत और शहद से तैयार स्वर्ण बिंदु पिलाया गया। यह प्रक्रिया आयुर्वेद में वर्णित एक महत्वपूर्ण संस्कार मानी जाती है, जिसे नियमित अंतराल पर करने की सलाह दी जाती है।
प्रभारी प्राचार्य डॉ. एल.एल. अहिरवाल ने बताया कि स्वर्ण प्राशन संस्कार बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ उनकी स्मरण शक्ति और मानसिक विकास में भी सहायक होता है। उन्होंने कहा कि यह संस्कार पाचन तंत्र को सुधारने और बच्चों के समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी लाभकारी माना जाता है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावकों की उपस्थिति रही, जिन्होंने आयुर्वेदिक पद्धति के प्रति विश्वास जताया। महाविद्यालय प्रशासन ने भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से लोगों को आयुर्वेद के प्रति जागरूक करने की बात कही।


