विदिशा में बनेगा किसानों का ‘स्कूल’, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मॉडल कृषि विज्ञान केंद्र का किया भूमि पूजन

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के बरखेड़ी जेतू में देश के एक अनूठे मॉडल कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) का भूमि पूजन किया। उन्होंने इसे किसानों का “स्कूल” बताते हुए कहा कि यह कार्यक्रम राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि खेती की पाठशाला है, जहां किसानों को सीधे खेतों में वैज्ञानिक खेती की तकनीकें सिखाई जाएंगी।

करीब 49 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाले इस मॉडल केवीके में इसी खरीफ सीजन से आधुनिक खेती के प्रदर्शन प्लॉट शुरू किए जाएंगे। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भवन निर्माण की प्रतीक्षा किए बिना खेतों में काम शुरू होगा और किसानों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण व्यावहारिक रूप से दिया जाएगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अनुसंधान और कृषि विज्ञान केंद्रों की उपलब्धियों को सीधे किसानों तक पहुंचाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि विदिशा, रायसेन, सीहोर और देवास जिलों के लिए वैज्ञानिक खेती का रोडमैप तैयार किया गया है। इसके तहत अनाज, दलहन, तिलहन, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और मशरूम उत्पादन को जोड़कर एकीकृत खेती के मॉडल विकसित किए जाएंगे, ताकि छोटे किसान भी सीमित भूमि पर बेहतर आय अर्जित कर सकें।

कार्यक्रम में ‘खेत बचाओ अभियान’ को विस्तार देते हुए केंद्रीय मंत्री ने किसानों से मिट्टी की जांच कर संतुलित उर्वरकों के उपयोग का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का प्रयोग भूमि की उर्वरता को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए प्राकृतिक और जैविक खेती को भी बढ़ावा दिया जाएगा तथा प्रत्येक किसान को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य तेज किया जाएगा।

शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा के इस मॉडल केवीके में ‘एग्री क्लिनिक’ स्थापित करने की घोषणा की, जहां किसान फसल, पत्तियों और मिट्टी के नमूनों की जांच कर विशेषज्ञों से तत्काल सलाह प्राप्त कर सकेंगे। किसानों को हेल्पलाइन और मोबाइल एप के माध्यम से भी रोग नियंत्रण, पोषक तत्व प्रबंधन और उर्वरकों के संतुलित उपयोग की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

उन्होंने नकली बीज, खाद और कीटनाशकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाते हुए किसानों से बिल लेने और क्यूआर कोड के माध्यम से उत्पादों की जांच करने की अपील की। साथ ही गुणवत्तापूर्ण बीज, नर्सरी विकास और बीज उपचार का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

छोटे किसानों की सुविधा के लिए मशीन बैंक और कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जहां लेजर लेवलर, डायरेक्ट सीडेड राइस मशीन, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक मशीनें किराये पर उपलब्ध होंगी। किसानों को इन तकनीकों का खेतों में लाइव प्रदर्शन भी दिखाया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने मूल्य संवर्धन और खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि कृषि आधारित स्टार्टअप, मशरूम उत्पादन, डेयरी, पोल्ट्री और मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

उन्होंने दलहन एवं तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए आत्मनिर्भरता मिशन को गति देने का संकल्प दोहराते हुए आश्वासन दिया कि किसानों द्वारा उत्पादित अरहर, उड़द और मसूर जैसी दालों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद सुनिश्चित की जाएगी। अधिक उत्पादन वाले क्षेत्रों में दाल मिलों की स्थापना के लिए 25 लाख रुपये तक की सहायता भी दी जाएगी।

कार्यक्रम के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से हाथ उठाकर धरती माता की रक्षा, संतुलित उर्वरक उपयोग और मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि ‘खेत बचाओ अभियान’ केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनआंदोलन है और विदिशा का यह मॉडल कृषि विज्ञान केंद्र पूरे देश के लिए प्रेरणा बनेगा।

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