बिहार को मत्स्य क्षेत्र में बड़ी सौगात, भोजपुर में इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क का शिलान्यास और पटना में एनएफडीबी क्षेत्रीय केंद्र का उद्घाटन आज

केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज बिहार को मत्स्य क्षेत्र में बड़ी सौगात देंगे। दोनों नेता भोजपुर जिले में 31.21 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क का शिलान्यास करेंगे और पटना में राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) के क्षेत्रीय केंद्र का उद्घाटन करेंगे।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य बिहार के अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक संसाधन प्रबंधन, कौशल विकास और मूल्य संवर्धन के माध्यम से सशक्त बनाना है। साथ ही मत्स्य पालन को गुणवत्ता आधारित, तकनीक-संचालित और निर्यातोन्मुख क्षेत्र के रूप में विकसित करना भी इसका लक्ष्य है।

बिहार के पास अंतर्देशीय मत्स्य संसाधनों का विशाल भंडार है। राज्य में लगभग 1.22 लाख हेक्टेयर तालाब एवं पोखर, 64 हजार हेक्टेयर जलाशय, 9.5 लाख हेक्टेयर चौर एवं परित्यक्त जल क्षेत्र तथा 21 हजार किलोमीटर से अधिक लंबी नदियां और नहरें मौजूद हैं। राज्य में रोहू, कतला, मृगल, तिलापिया, पंगासियस, मागुर, झींगा और सजावटी मछलियों का व्यापक उत्पादन किया जाता है।

पिछले 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने बिहार में मत्स्य क्षेत्र से संबंधित 902.84 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत 579.72 करोड़ रुपये की परियोजनाएं शामिल हैं। इन निवेशों से हैचरी, फीड प्लांट, बायोफ्लॉक एवं आरएएस इकाइयां, कोल्ड चेन, परिवहन सुविधाएं और जलीय रोग जांच प्रयोगशालाओं जैसी आधारभूत संरचनाएं विकसित हुई हैं।

इन प्रयासों का परिणाम यह रहा है कि बिहार का मत्स्य उत्पादन दोगुने से अधिक बढ़ा है और राज्य अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन में नौवें स्थान से चौथे स्थान पर पहुंच गया है। बिहार अब प्रतिवर्ष लगभग 89,600 मीट्रिक टन मछली पड़ोसी राज्यों को भेजते हुए क्षेत्र का शुद्ध निर्यातक बन चुका है।

भोजपुर के वनसौर मत्स्य बीज फार्म में स्थापित होने वाले इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क में कार्प एवं कैटफिश हैचरी, ब्रूडर यूनिट, बायोफ्लॉक सिस्टम, आरएएस इकाइयां, फिश फीड मिल, जल गुणवत्ता एवं रोग निदान प्रयोगशालाएं, क्वारंटीन सुविधाएं तथा 50 बिस्तरों वाला प्रशिक्षण छात्रावास विकसित किया जाएगा। इससे गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज की उपलब्धता बढ़ेगी और आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा।

वहीं, पटना में स्थापित होने वाला एनएफडीबी क्षेत्रीय केंद्र बिहार सहित पूर्वी भारत के लिए संस्थागत सहायता केंद्र के रूप में कार्य करेगा। यह केंद्र आरएएस, बायोफ्लॉक, केज कल्चर और प्रिसीजन फार्मिंग जैसी आधुनिक प्रणालियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ मछुआरों और उद्यमियों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और क्षमता विकास में सहायता प्रदान करेगा।

केंद्र सरकार का मानना है कि इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क और एनएफडीबी क्षेत्रीय केंद्र मिलकर बिहार में उत्पादन से लेकर तकनीकी सहायता तक की एक मजबूत व्यवस्था तैयार करेंगे, जिससे उत्पादकता, रोजगार और मछुआरों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित होगी।

गया में 170 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी सेंटर, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे शिलान्यास

बिहार के गया जिले के खिजरसराय में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होने जा रही है। केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 15 जून 2026 को प्रस्तावित टेक्नोलॉजी सेंटर का शिलान्यास करेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक भूमि पूजन के साथ होगी, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।

करीब 170 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह टेक्नोलॉजी सेंटर 20 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा। इसमें उत्पादन ब्लॉक, प्रशिक्षण ब्लॉक, प्रशासनिक भवन, बहुउद्देश्यीय हॉल, छात्रावास और स्टाफ आवास जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यह केंद्र सामान्य इंजीनियरिंग, हेवी इंजीनियरिंग और टेक्सटाइल टेस्टिंग जैसे प्रमुख क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करेगा।

यह संस्थान गया, औरंगाबाद, नवादा, नालंदा, जहानाबाद और मुंगेर सहित दक्षिण बिहार के विभिन्न जिलों के एमएसएमई उद्यमों को उन्नत तकनीक, तकनीकी परामर्श और कौशल विकास की सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। यहां सीएनसी मशीनिंग, सीएडी/सीएएम/सीएई, रैपिड प्रोटोटाइपिंग, इंडस्ट्री 4.0 लैब और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों जैसी अत्याधुनिक सेवाएं दी जाएंगी।

केंद्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), डेटा एनालिटिक्स, ऑटोमेशन, गुणवत्ता नियंत्रण और टेक्सटाइल से जुड़े उद्योगोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। इसके अलावा बाजार अनुसंधान, प्रोटोटाइप विकास, डिजिटल मार्केटिंग, ब्रांडिंग, इनक्यूबेशन और व्यवसाय विकास संबंधी सलाहकारी सेवाएं भी उपलब्ध होंगी।

अनुमान है कि यह टेक्नोलॉजी सेंटर हर वर्ष लगभग 7,000 युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण देगा तथा 1,000 से अधिक स्थानीय एमएसएमई इकाइयों को टूलिंग और जॉब वर्क से संबंधित सहायता प्रदान करेगा। यह परियोजना दक्षिण बिहार के औद्योगिक विकास को गति देने के साथ-साथ मगध क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *