ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक में ‘इंदौर घोषणा’ को मंजूरी, वैश्विक कृषि सहयोग को मिला नया रोडमैप
नई दिल्ली, 14 जून : भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में इंदौर में आयोजित ब्रिक्स कृषि मंत्रियों और अधिकारियों की बैठक का समापन सर्वसम्मति से ‘इंदौर घोषणा’ को अपनाने के साथ हुआ। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे वैश्विक कृषि सहयोग के लिए एक ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हुए कहा कि यह घोषणा खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण और टिकाऊ कृषि विकास को नई दिशा देगी।
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वैश्विक संकटों और अनिश्चितताओं के बीच ब्रिक्स देशों ने दुनिया को आशा, विश्वास और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र की साझा चुनौतियों का समाधान मिलकर खोजने का यह महत्वपूर्ण प्रयास है।
उन्होंने बताया कि ब्रिक्स देशों की आबादी दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती है। इन देशों के पास विश्व की लगभग 42 प्रतिशत कृषि भूमि है और वैश्विक खाद्यान्न उत्पादन में भी इनकी हिस्सेदारी करीब 42 प्रतिशत है। ऐसे में कृषि के क्षेत्र में ब्रिक्स की सामूहिक आवाज वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली भूमिका निभा सकती है।
बैठक में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, कृषि व्यापार सहयोग, जलवायु अनुकूल और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने तथा कृषि क्षेत्र में नवाचार और तकनीक को मजबूत करने जैसे चार प्रमुख विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों की चुनौतियों, ऋण, बाजार संपर्क और उचित मूल्य जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इंदौर में अपनाई गई संयुक्त घोषणा अब ‘इंदौर घोषणा’ के नाम से जानी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस घोषणा का केंद्र बिंदु किसान हैं और इसमें खाद्य सुरक्षा, पोषण, आजीविका, निवेश, नवाचार और टिकाऊ कृषि विकास के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता दर्ज की गई है।
बैठक में चार नई संस्थागत पहलों की घोषणा भी की गई। इनमें कृषि पारिस्थितिकी और पुनर्योजी खेती के लिए उत्कृष्टता केंद्रों का ब्रिक्स नेटवर्क, डिजिटल कृषि नेटवर्क, बीज प्रणालियों में किसानों के अधिकारों के लिए वैश्विक मंच तथा ब्रिक्स एग्रीएन (AgriN) नेटवर्क की स्थापना शामिल है।
डिजिटल कृषि नेटवर्क के तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भू-स्थानिक तकनीक और डेटा आधारित कृषि समाधानों पर सहयोग बढ़ाया जाएगा। इस नेटवर्क के समन्वय की जिम्मेदारी भारत के आईआईटी दिल्ली को सौंपी गई है। वहीं, प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्कृष्टता केंद्र नेटवर्क में मोदीनगर स्थित भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स देशों ने कृषि अनुसंधान को प्रयोगशालाओं से खेतों तक पहुंचाने के लिए ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच को और सशक्त बनाने पर भी सहमति व्यक्त की है। इसके साथ ही कृषि व्यापार को निष्पक्ष, पारदर्शी और समावेशी बनाने तथा ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज जैसी पहलों को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
जलवायु परिवर्तन और एल नीनो जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पुनर्योजी और जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत प्राकृतिक खेती और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को मिशन मोड में बढ़ावा दे रहा है।
उर्वरकों की बढ़ती कीमतों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों को यूरिया 266 रुपये और डीएपी 1,350 रुपये प्रति बोरी की दर पर उपलब्ध कराई जाती रहेगी और अतिरिक्त आर्थिक बोझ केंद्र सरकार वहन करेगी।
उन्होंने कहा कि कृषि के भविष्य को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना आवश्यक है। भारत में कृषि आधारित स्टार्टअप और तकनीक आधारित नवाचार तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और ब्रिक्स देशों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान से इस दिशा को और मजबूती मिलेगी।
शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर में हुए आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि मालवा की आतिथ्य परंपरा ने सभी विदेशी प्रतिनिधियों को प्रभावित किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने मेघदूत गार्डन में वृक्षारोपण कर ‘ब्रिक्स वाटिका’ की स्थापना भी की।
उन्होंने कहा कि इंदौर में आयोजित यह सम्मेलन ‘टीम इंडिया’ और ‘होल ऑफ गवर्नमेंट अप्रोच’ का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसने इस ब्रिक्स बैठक को ऐतिहासिक और यादगार बना दिया।


