एनडीए से प्रशिक्षित पहली महिला कैडेट्स का रक्षा बलों में कमीशन, रचा गया ऐतिहासिक अध्याय
नई दिल्ली, 13 जून 2026: भारत के सैन्य इतिहास में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक अध्याय जुड़ गया है। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली पहली महिला कैडेट्स की टुकड़ी अब भारतीय सशस्त्र बलों में अधिकारी के रूप में शामिल हो गई है। यह उपलब्धि न केवल महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक है, बल्कि समान अवसर, योग्यता और उत्कृष्टता के प्रति देश की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
अगस्त 2022 में एनडीए के 148वें कोर्स के तहत प्रवेश लेने वाली 17 महिला कैडेट्स ने विभिन्न सेवा अकादमियों में अपना कठोर प्री-कमीशन प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया और अब वे भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना का हिस्सा बन गई हैं।
भारतीय सेना में नौ महिला अधिकारियों को 13 जून 2026 को देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में आयोजित 158वें नियमित पाठ्यक्रम की पासिंग आउट परेड के दौरान कमीशन प्रदान किया गया। इस ऐतिहासिक परेड की समीक्षा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने की।
भारतीय वायुसेना में पांच महिला अधिकारियों को हैदराबाद के डुंडीगल स्थित वायुसेना अकादमी में आयोजित 217वें कोर्स की संयुक्त स्नातक परेड के दौरान कमीशन दिया गया। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि रहे और उन्होंने परेड की सलामी ली।
वहीं, भारतीय नौसेना में तीन महिला अधिकारियों को 28 मई 2026 को केरल के एझिमाला स्थित भारतीय नौसेना अकादमी में आयोजित स्प्रिंग टर्म 2026 पासिंग आउट परेड के दौरान कमीशन प्रदान किया गया। इस परेड की समीक्षा दक्षिणी नौसैनिक कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल समीर सक्सेना ने की थी।
इन 17 महिला अधिकारियों के कमीशन होने के साथ ही वे उन सैन्य नेताओं के समूह का हिस्सा बन गई हैं, जिन्हें राष्ट्र की सेवा और सुरक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह उपलब्धि भारतीय सशस्त्र बलों में हो रहे परिवर्तन और महिलाओं के लिए बढ़ते अवसरों की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।
यह ऐतिहासिक क्षण इन महिला अधिकारियों की कड़ी मेहनत, अनुशासन, समर्पण और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। साथ ही यह देशभर की लाखों युवतियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा, जो वर्दी पहनकर राष्ट्र निर्माण और देश सेवा का सपना देखती हैं।
एनडीए से प्रशिक्षित पहली महिला कैडेट्स का यह सफर भारतीय सैन्य इतिहास में सदैव स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देगा कि प्रतिभा और संकल्प के बल पर कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।


