आपदा प्रबंधन प्रणाली होगी और मजबूत, खोज-बचाव एवं वाटर रेस्क्यू प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

हरिद्वार, 13 जून 2026: आपदा प्रबंधन तंत्र को और अधिक प्रभावी एवं सशक्त बनाने की दिशा में हरिद्वार जिले में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के संयुक्त तत्वावधान में पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस प्रशिक्षण में आपदा मित्रों और ग्रामीण स्वयंसेवकों को खोज-बचाव, प्राथमिक उपचार तथा वाटर रेस्क्यू से संबंधित विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आपदा मित्रों की क्षमता में वृद्धि करना तथा उन्हें बाढ़ प्रबंधन, जलजनित आपदाओं से निपटने, खोज एवं बचाव कार्यों और वाटर रेस्क्यू की सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना है। इसके माध्यम से स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित स्वयंसेवकों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो आपदा की स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।

इस अवसर पर प्रतिभागियों को जनपद स्तर पर 24 घंटे संचालित आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम को किसी भी आपात स्थिति की त्वरित और स्पष्ट सूचना उपलब्ध कराने के लिए भी जागरूक किया गया, ताकि राहत एवं बचाव कार्यों में समय पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

कार्यक्रम के दौरान मास्टर ट्रेनर मनोज कंडियाल ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 और जनपद में संचालित इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम (आईआरएस) की कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आपदा के समय विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने में आईआरएस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

वहीं, एनडीआरएफ टीम के सब-इंस्पेक्टर रविंद्र कुमार ने प्रतिभागियों को आधुनिक खोज एवं बचाव तकनीकों, आपदा जोखिम न्यूनीकरण के उपायों और समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन की तैयारियों के बारे में विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने स्थानीय ग्रामीण स्वयंसेवकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रारंभिक घंटों में उनकी सक्रिय भागीदारी कई लोगों की जान बचाने में सहायक सिद्ध हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल आपदा के प्रति समुदाय की तैयारियों को मजबूत करते हैं, बल्कि आम नागरिकों में जागरूकता और आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं। इससे भविष्य में बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जनहानि और नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *