यूपीआई ने पूरे किए 10 साल, बना दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट प्लेटफॉर्म
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने अपने सफल संचालन के 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं और इस दौरान यह दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट्स प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है। आज यूपीआई भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ बन चुका है।
UPI को 11 अप्रैल 2016 को नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के सहयोग से लॉन्च किया गया था। शुरुआत में जहां वित्तीय वर्ष 2016-17 में केवल 2 करोड़ लेन-देन दर्ज किए गए थे, वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर हजारों करोड़ लेन-देन तक पहुंच गई है।
लेन-देन के कुल मूल्य में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। शुरुआती दौर में यह मात्र 0.07 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 314 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह वृद्धि भारत में डिजिटल भुगतान प्रणाली की तेजी से बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यूपीआई को बड़ी मान्यता मिली है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने इसे दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बताया है। वर्ष 2024 तक वैश्विक रियल-टाइम पेमेंट्स में यूपीआई की हिस्सेदारी लगभग 49 प्रतिशत तक पहुंच गई।
वर्ष 2025 में यूपीआई ने एक और कीर्तिमान स्थापित करते हुए अगस्त में 2000 करोड़ मासिक लेन-देन का आंकड़ा पार किया, जो दिसंबर 2025 में बढ़कर 2163 करोड़ तक पहुंच गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीआई की यह सफलता भारत को डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान कर रही है और भविष्य में इसके और विस्तार की संभावनाएं भी मजबूत हैं।


