झंडूता के वीर सपूत बलदेव चंद को मरणोपरांत शौर्य चक्र, अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को राष्ट्र का नमन

बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश), 9 जून। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के झंडूता उपमंडल की ग्राम पंचायत सनीहरा के गांव थेह के वीर सपूत बलदेव चंद को उनकी असाधारण वीरता, कर्तव्यनिष्ठा और मातृभूमि की रक्षा के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान के सम्मान स्वरूप मरणोपरांत शौर्य चक्र से अलंकृत किया गया है। राष्ट्रपति द्वारा घोषित वीरता पुरस्कारों में उनका नाम शामिल होने से पूरे क्षेत्र में गर्व और सम्मान का माहौल है।

बलदेव चंद 19 सितंबर 2025 को जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के सियोज धार खड्ड नाला क्षेत्र में चलाए गए एक महत्वपूर्ण आतंकवाद विरोधी अभियान का हिस्सा थे। अभियान के दौरान आतंकियों द्वारा किए गए घातक हमले में उन्होंने अद्वितीय साहस और धैर्य का परिचय दिया। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने आतंकियों का डटकर मुकाबला किया और अपने साथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुठभेड़ के दौरान बलदेव चंद ने एक आतंकी से विदेश निर्मित पिस्तौल छीन ली तथा अभियान दल को दोबारा संगठित करने में योगदान दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने अंतिम क्षण तक आतंकियों का सामना किया और राष्ट्र की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। उनके इस अद्वितीय बलिदान और साहस ने भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं को और सुदृढ़ किया।

भारतीय सेना ने उनकी वीरता और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण को सम्मानित करते हुए उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र प्रदान किया। यह सम्मान उनकी धर्मपत्नी शिवानी रनौत और माता विजय कुमारी ने ग्रहण किया।

बलदेव चंद एक सैन्य परंपरा वाले परिवार से संबंध रखते थे। उनके पिता विशन दास भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं, जबकि परिवार के अन्य सदस्य भी सेना में सेवाएं दे चुके हैं। उनकी वीरता और बलिदान की गाथा आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।

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